
Big Update for Bank Account Holders : हाल ही में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने मिनिमम बैलेंस को लेकर एक अहम बात साफ की है, जिससे बैंक ग्राहकों के बीच चल रहा कन्फ्यूजन काफी हद तक दूर हो गया है। RBI ने स्पष्ट किया है कि अब पूरे देश के लिए मिनिमम बैलेंस को लेकर कोई एक जैसा सख्त नियम लागू नहीं किया जाएगा। यानी RBI खुद यह तय नहीं करेगा कि सेविंग अकाउंट में कितना पैसा रखना जरूरी है। यह अधिकार अब पूरी तरह बैंकों को दिया गया है।
RBI के मुताबिक, हर बैंक अपनी व्यावसायिक नीति, संचालन लागत और बाजार रणनीति को ध्यान में रखते हुए मिनिमम बैलेंस तय कर सकता है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी कहा है कि यह मामला नियामक दायरे में नहीं आता, इसलिए इसमें RBI की सीधी भूमिका नहीं होगी। इसी वजह से SBI, PNB और HDFC जैसे बैंकों के नियमों में अंतर दिखना बिल्कुल सामान्य है।
1. SBI (State Bank of India) – मिनिमम बैलेंस की झंझट खत्म
SBI ने काफी समय पहले ही अपने सभी प्रमुख सेविंग अकाउंट्स से मिनिमम बैलेंस बनाए रखने की अनिवार्यता को पूरी तरह खत्म कर दिया था। इसका सीधा फायदा यह हुआ कि अब खाताधारकों को खाते में किसी तय रकम को बनाए रखने की चिंता नहीं करनी पड़ती। चाहे खाते में बैलेंस कम हो या बिल्कुल शून्य, बैंक की तरफ से किसी भी तरह की पेनल्टी या अतिरिक्त चार्ज नहीं लगाया जाता। यह फैसला खासतौर पर छात्रों, छोटे व्यापारियों, दिहाड़ी मजदूरों और कम आय वाले वर्ग के लिए बेहद राहत भरा साबित हुआ है, जिन्हें पहले बैलेंस न होने पर जुर्माना देना पड़ता था। SBI के इस ग्राहक-केंद्रित कदम को काफी सराहना मिली, जिसके बाद कई अन्य सरकारी बैंकों ने भी इसी मॉडल को अपनाना शुरू कर दिया, ताकि बैंकिंग सेवाएं हर वर्ग के लिए आसान और सुलभ बन सकें।
2. PNB (Punjab National Bank) – पेनल्टी से मिली राहत
PNB ने अपने ग्राहकों को बड़ी राहत देते हुए 1 जुलाई 2025 से ज़्यादातर सेविंग अकाउंट्स पर मिनिमम बैलेंस से जुड़ी पेनल्टी खत्म कर दी है। अब अगर खाते में तय बैलेंस नहीं भी रहता है, तो ग्राहक से किसी तरह का जुर्माना नहीं वसूला जाएगा। बैंक का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना और सेवाओं को आसान बनाना है। इस फैसले से खासतौर पर महिलाएं, किसान और निम्न आय वर्ग के ग्राहक राहत महसूस कर रहे हैं, क्योंकि अब उन्हें खाते में बैलेंस बनाए रखने का अतिरिक्त दबाव नहीं झेलना पड़ेगा।
3. HDFC बैंक – नियमों में कोई बदलाव नहीं
वहीं दूसरी तरफ HDFC बैंक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उसके सेविंग अकाउंट्स के मिनिमम बैलेंस से जुड़े नियमों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है और वे पहले की तरह ही लागू रहेंगे। HDFC के रेगुलर सेविंग अकाउंट रखने वाले ग्राहकों को हर महीने औसतन ₹10,000 का बैलेंस बनाए रखना जरूरी होता है। वहीं अगर कोई ग्राहक Savings Max Account का उपयोग करता है, तो उसके लिए यह सीमा बढ़कर ₹25,000 हो जाती है। हालांकि बैंक ने यह भी साफ किया है कि Basic Savings Bank Deposit Account (BSBDA) और सैलरी अकाउंट धारकों पर यह नियम लागू नहीं होता। ऐसे खाते बिना मिनिमम बैलेंस के भी चलाए जा सकते हैं, जिससे नौकरीपेशा लोगों और बेसिक अकाउंट रखने वाले ग्राहकों को किसी तरह की अतिरिक्त चिंता नहीं करनी पड़ती।
RBI का साफ रुख क्या है?
- मिनिमम बैलेंस तय करना RBI के सीधे नियंत्रण में नहीं है।
- हर बैंक को अपनी नीति के अनुसार फैसला लेने की छूट है।
- कुछ बैंक ग्राहकों की सुविधा के लिए पेनल्टी खत्म कर रहे हैं, जबकि कुछ अब भी नियमों पर कायम हैं।
इसीलिए ग्राहकों के लिए जरूरी है कि वे अपने बैंक के नियमों को समय-समय पर समझते और जांचते रहें, ताकि बेवजह चार्ज से बचा जा सके।
निष्कर्ष
आज के दौर में बैंकिंग सिस्टम तेजी से बदल रहा है और फोकस पहले से ज्यादा ग्राहक सुविधा पर है। SBI और PNB जैसे बड़े सरकारी बैंकों ने मिनिमम बैलेंस पेनल्टी हटाकर आम लोगों को राहत दी है। वहीं HDFC जैसे निजी बैंक अब भी तय बैलेंस की शर्त रखते हैं। ऐसे में समझदारी इसी में है कि ग्राहक अपने अकाउंट से जुड़े नियमों की जानकारी रखें, ताकि कोई अनचाहा जुर्माना न देना पड़े।








